मुझे अच्छा लगता है तुझसे गुफ्तगू करना
ऐसा लगता है कि लौट आया हो कोई अपना।
तू हज़ार बार भी रूठे तो मना लूँगा तुझे
मगर देख मोहब्बत में शामिल कोई दूसरा ना हो।
किस्मत यह मेरा इम्तेहान ले रही है
तड़प कर यह मुझे दर्द दे रही है
दिल से कभी भी मैंने उसे दूर नहीं किया
फिर क्यों बेवफाई का वह इलज़ाम दे रही है
सच्ची मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती
वक़्त के साथ खामोश हो जाती है।